शिक्षा मंत्रालय ने आईआईटी कानपुर में छात्र आत्महत्याओं की जांच शुरू की, समीक्षा पैनल गठित

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में हाल के छात्र आत्महत्याओं की जांच शुरू कर दी है और एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समीक्षा पैनल गठित किया है। यह पैनल घटनाओं की जांच करेगा और उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली को मजबूत करने के उपाय सुझाएगा।

राष्ट्रीय शैक्षणिक प्रौद्योगिकी मंच (एनईटीएफ) के चेयरमैन प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता में गठित इस पैनल में वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. जितेंद्र नागपाल और शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त सचिव (उच्च शिक्षा) रिना सोनोवाल कौली शामिल हैं। पैनल को आईआईटी कानपुर में हाल की आत्महत्याओं की परिस्थितियों की समीक्षा करने, जुलाई २०२३ में जारी ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों की भावनात्मक और मानसिक कल्याण के लिए फ्रेमवर्क गाइडलाइंस’ का अनुपालन जांचने तथा काउंसलिंग सेवाओं, शिकायत निवारण तंत्र और संस्थागत सहायता में कमियों की पहचान करने का कार्य सौंपा गया है।

जनवरी २०२६ की शुरुआत में आईआईटी कानपुर में दो छात्र आत्महत्याओं की घटनाएं हुई थीं, जिनमें एक पीएचडी छात्र रामस्वरूप इशराम शामिल थे। इन घटनाओं ने छात्रों, अभिभावकों और शैक्षणिक समुदाय में गहरी चिंता पैदा कर दी थी। पैनल को १५ दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। यह पैनल आईआईटी कानपुर के हितधारकों, संकाय सदस्यों, छात्रों और प्रशासन से बातचीत कर सकता है।

शिक्षा मंत्रालय ने प्रमुख संस्थानों में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया है। पैनल पूरे देश के आईआईटी, एनआईटी और अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में लागू किए जाने वाले मानसिक स्वास्थ्य सुधारों का सुझाव भी देगा।

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आईआईटी कानपुर प्रशासन ने जांच में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। संस्थान पहले ही अपनी काउंसलिंग सेल को मजबूत कर चुका है, लेकिन मंत्रालय बाहरी मूल्यांकन चाहता है।

शिक्षा विशेषज्ञों ने पैनल के गठन का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि उच्च दबाव वाले वातावरण में शैक्षणिक दबाव, प्रदर्शन की चिंता और अपर्याप्त सहायता प्रणाली अक्सर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती है। छात्र संगठनों ने मानसिक स्वास्थ्य सुधारों के तेज क्रियान्वयन और पारदर्शिता की मांग की है।

यह जांच राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में छात्र कल्याण के प्रति केंद्र सरकार की गंभीरता को दर्शाती है। रिपोर्ट और सिफारिशें कैंपस को छात्रों के लिए अधिक सुरक्षित और सहायक बनाने में नीतिगत बदलावों का मार्गदर्शन करेंगी।

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